महाप्रयाण को जाते हुये
उन बंद होती आँखों में ,
एक खवाब था जागा हुआ
शायद ,अब याद आ जाये
उसे माँ की लोरी
या ,याद आ जाये
मेला घुमाती
बापू की उंगली ,
शायद, याद आ जाये
गम की धूप से बचाता
माँ का आंचल
या ,याद आ जाये
उपदेश देती
बापू की वाणी
पर शायद याद
अब उसे कुछ न आता
पर -
जब उसने साथ
हमारा चाहा
हर पल हमको
साथ अपने पाया
जब जागा
एक बचपन हममे
मुंह उसने हमसे
तब फेर लिया
आंखों का तारा बना
अपने दिल में जिसे बसाया
आकाश -कुसुम बन
वो हमसे दूर हो गया
सारा जीवन जिसपर वारा
एक कोना,हमने ना
उसके घर पाया
याद उसकी हमे जब
बहुत सताती
तब
तस्वीर सहलाकर उसकी
यादों में हम खो जाते है
कल्पना के पंख लगाकर
उसके संग लाड़ लडाते है
अंतिम इच्छा बस
तुमसे इतनी
बस एक बार अब
तुम आ जाओ
अपनी सूरत हमे
दिखा जाओ
अपने कांधों पर उठाकर भार हमारा
भव -सागर से
पार लगा जाओ
अपना इतना
फर्ज तो निभा जाओ
दुनियां की तो रीत
निभा जाओ
बस एक बार
सिर्फ एक बार
तुम आ जाओ..
उन बंद होती आँखों में ,
एक खवाब था जागा हुआ
शायद ,अब याद आ जाये
उसे माँ की लोरी
या ,याद आ जाये
मेला घुमाती
बापू की उंगली ,
शायद, याद आ जाये
गम की धूप से बचाता
माँ का आंचल
या ,याद आ जाये
उपदेश देती
बापू की वाणी
पर शायद याद
अब उसे कुछ न आता
पर -
जब उसने साथ
हमारा चाहा
हर पल हमको
साथ अपने पाया
जब जागा
एक बचपन हममे
मुंह उसने हमसे
तब फेर लिया
आंखों का तारा बना
अपने दिल में जिसे बसाया
आकाश -कुसुम बन
वो हमसे दूर हो गया
सारा जीवन जिसपर वारा
एक कोना,हमने ना
उसके घर पाया
याद उसकी हमे जब
बहुत सताती
तब
तस्वीर सहलाकर उसकी
यादों में हम खो जाते है
कल्पना के पंख लगाकर
उसके संग लाड़ लडाते है
अंतिम इच्छा बस
तुमसे इतनी
बस एक बार अब
तुम आ जाओ
अपनी सूरत हमे
दिखा जाओ
अपने कांधों पर उठाकर भार हमारा
भव -सागर से
पार लगा जाओ
अपना इतना
फर्ज तो निभा जाओ
दुनियां की तो रीत
निभा जाओ
बस एक बार
सिर्फ एक बार
तुम आ जाओ..