महावर न लगती...

महावर न लगती ,न मेहेंदी ही रचती
लडकी यहाँ कोई, दुल्हन न बनती
न गूंजे कभी भी ,ढोलक की थापे
न बन्नी ही गवती,न शहनाई बजती ,
न बन्नी...

न आती बारातें ,न होती विदाई
सेजें तो सजतीं ,सुहागन न बनतीं ,
सेजें तो...

रोते हैं अरमां,बहते हैं आंसूं ,
अपने घर को ,सदा ये तरसतीं,
अपने घर...

कोई न बाबुल ,यहाँ इनका होता
भाई के हाथों को,राखी तरसती ,
भाई के...

बेटी भी लुट्तीं,बहनें भी लुट्तीं
बिन ब्याही माँ अक्सर ये बनतीं
बिन ब्याही...

रूठीं बहारें इनके घरों से
अपनों के दामन को ये हैं तरसतीं
अपनों के...

बजते हैं घुंघरू ,प्याले छलकते
मुस्कराते लबों पर ,आहें तांडव हैं करतीं
मुस्कराते लबों...

टूटे न ये फूल डाली से खुद ही
अपनों के हाथों अक्सर ये छलती
अपनों के...

चाहतीं हैं ये भी कुमकुम का गौरव
सुहागिन कहलाने को ये हैं तरसतीं
सुहागिन कहलाने...
महावर न लगती...