बहुत याद आतें हैं वो बीते दिन अपने
वो हंसी-ठहाके वो हॉस्टल की बातें
हॉस्टल नहीं,प्यारा सा एक घर था वो अपना
बसती थी जहाँ वसुधैव कुटुम्बकम,की भावना
एक ही छत के नीचे जहाँ हर मजहब था बसता
कोइ गिरजाघर को जाता,कोइ अल्लाह को याद करता
अरदास कोइ करता यहाँ पर,कोइ बजाता मंदिर का घंटा
बहुत ...
रैंगिंग के समय वो लड़ना-झगड़ना
बाद मे एक दूसरे का हमराज बनना
क्लास बंक करने पर दोस्तों की प्रॉक्सी लगाना
वार्डेन की डांट से एक-दूसरे को बचाना
बहुत ...
मेस की मेज पर सदा वो छीना-झपटी करना
संकट आने पर एक-दूसरे के लिए गैरों से लड़ना
दिन-रात वो हल्ला-गुल्ला मचाना
एक्जाम आते ही वो किताबों में सिर छिपाना
सब चीज मिल-बांटकर खाना-पहनना
दुःख-बीमारी में एक-दूसरे की वो सेवा-टहल करना
बहुत...
गर्ल्स-हॉस्टल के बाहर वो लगाना ठहाके
रातो को बैठना वो थड़ी के किनारे
धुंए के छल्लों में हर फ़िक्र को हवा में उड़ाते
टेंशन में आकर कभी आपस में मय के जाम छलकाते
बहुत ...
गलत राह चलते दोस्तों को समझाना
जिम्मेदारियों का अहसास मन में जगाना
भ्रमित हो गलत राह पर चलना और गिरना
लगती जब ठोकर तो फिर खुद ही संभलना
बहुत ...
कोई रोका-टोका नहीं थी न बंधन कोई था
टेंशन के साथ भी खुशहाल जीवन बहुत था
एक ही मकसद था यहाँ हम सबका
भविष्य को अपने उज्जवल और उज्जवल बनाना
बहुत...
खट्टे-मीठे हॉस्टल जीवन के अनुभव समेटे
खाली दामन को अपने उम्मीदों से भरते
आओ मना लें दोस्तों एक जश्ने -जुदाई
न जाने इस जश्ने -महफ़िल मे अब हम फिर कब मिलें
बहुत ...
वो हंसी-ठहाके वो हॉस्टल की बातें
हॉस्टल नहीं,प्यारा सा एक घर था वो अपना
बसती थी जहाँ वसुधैव कुटुम्बकम,की भावना
एक ही छत के नीचे जहाँ हर मजहब था बसता
कोइ गिरजाघर को जाता,कोइ अल्लाह को याद करता
अरदास कोइ करता यहाँ पर,कोइ बजाता मंदिर का घंटा
बहुत ...
रैंगिंग के समय वो लड़ना-झगड़ना
बाद मे एक दूसरे का हमराज बनना
क्लास बंक करने पर दोस्तों की प्रॉक्सी लगाना
वार्डेन की डांट से एक-दूसरे को बचाना
बहुत ...
मेस की मेज पर सदा वो छीना-झपटी करना
संकट आने पर एक-दूसरे के लिए गैरों से लड़ना
दिन-रात वो हल्ला-गुल्ला मचाना
एक्जाम आते ही वो किताबों में सिर छिपाना
सब चीज मिल-बांटकर खाना-पहनना
दुःख-बीमारी में एक-दूसरे की वो सेवा-टहल करना
बहुत...
गर्ल्स-हॉस्टल के बाहर वो लगाना ठहाके
रातो को बैठना वो थड़ी के किनारे
धुंए के छल्लों में हर फ़िक्र को हवा में उड़ाते
टेंशन में आकर कभी आपस में मय के जाम छलकाते
बहुत ...
गलत राह चलते दोस्तों को समझाना
जिम्मेदारियों का अहसास मन में जगाना
भ्रमित हो गलत राह पर चलना और गिरना
लगती जब ठोकर तो फिर खुद ही संभलना
बहुत ...
कोई रोका-टोका नहीं थी न बंधन कोई था
टेंशन के साथ भी खुशहाल जीवन बहुत था
एक ही मकसद था यहाँ हम सबका
भविष्य को अपने उज्जवल और उज्जवल बनाना
बहुत...
खट्टे-मीठे हॉस्टल जीवन के अनुभव समेटे
खाली दामन को अपने उम्मीदों से भरते
आओ मना लें दोस्तों एक जश्ने -जुदाई
न जाने इस जश्ने -महफ़िल मे अब हम फिर कब मिलें
बहुत ...